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Indoo Ki Jawani Movie Review || इंदु की जवानी फिल्म समीक्षा

इंदु की जवानी फिल्म समीक्षा || Indoo Ki Jawani Movie Review




50 प्रतिशत क्षमता के साथ दर्शकों के लिए खुले सिनेमाघरों में कियारा आडवाणी और आदित्य सील अभिनीत फिल्म 'इंदू की जवानी' रिलीज हुई है। 



कहानी


जैसा कि नाम से ही साफ है फिल्म  की कहानी के केंद्र में इंदू है। उसका ठरकी बॉयफ्रेंड उसे छोड़ देता है। धोखा देता है। इंदू चिढ़ जाती है और तय करती कि वह डेटिंग ऐप और वन-नाइट स्टैंड के जरिए अब अपना प्यार तलाशेगी। लेकिन जिस शाम को रूमानी होना था, वह उसकी जिंदगी में भूचाल लेकर आता है। इंदू जिस लड़के के साथ डेट पर जाती है वह पाकिस्तानी निकलता है।



फिल्म के शुरुआती 10 मिनट दर्शक को बांधने की कोशिश करते हैं। शुरुआत के कुछ सीन्स से ऐसा लगता है कि जैसे यह फिल्म कॉमिक स्पाई थ्रिलर है, लेकिन कुछ देर बाद पूरी कहानी पटरी से उतरती नजर आती है और फिर पूरी फिल्म में वह रोमांच नहीं रह जाता। बुजुर्गों से लेकर जवान लड़कों तक तमाम लोग इंदू का अटेंशन पाने के लिए परेशान रहते हैं। साफ है कि फिल्म में कैजुअल सेक्सिज्म दिखाने की कोशिश की गई है।




स्टार की परफॉरमेंस


आदित्य सील को जितने डायलॉग्स मिले थे, उसे वह बस बोल जाते हैं।

मल्लिका दुआ की कॉमेडी में नयापन नहीं है। सावन में लग गई आग गाना कर्णप्रिय है। मल्लिका दुआ ने एक बार फिर से स्टीरियोटाइप स्मॉल टाउन गर्ल का किरदार किया है। फिल्म की शुरुआत में वह अपने डायलॉग्स से थोड़ा बांधने और कॉमेडी की कोशिश करती हैं, लेकिन एक बार इंदू यानी कियारा आडवाणी के घर पर फोकस होने के बाद फिल्म में वह दम नहीं दिखता।



कियारा फिल्म में बेहद खूबसूरत नजर आती हैं, लेकिन उनकी कॉमिक टाइमिंग काफी कमजोर दिखती है। फिर भी वह अपने क्यूट और चुलबुले अंदाज से रंग जमा लेती हैं।

इसके अलावा कियारा आडवाणी और आदित्य के बीच बहुत अच्छी केमिस्ट्री देखने को नहीं मिलती। यह बात आपको पूरे फिल्मो में खलती है। हालांकि, आदित्य  और कियारा दोनों ही आंखों को सुकून देते हैं। ऐसा लगता है कि डायरेक्टर ने फिल्म में जबरन शर्टलेस सीन्स डालने की कोशिश की है।



राकेश बेदी जैसी अनुभवी कलाकार को इस फिल्म में व्यर्थ कर दिया गया है।




डायरेक्शन


राइटर-डायरेक्टर अबीर सेनगुप्ता की कहानी बुरी तरह गच्चे खाती है। कई मौकों पर यह मूर्खता से भरी हुई है। इंदू का कैरेक्टरर भी खुद में कंफ्यूज है कि उसे बिंदास और बेबाक बनना है या 'लोग क्यां कहेंगे' की चिंता करनी है।




कहा रह गयी कमी


कुल मिलाकर 'इंदू की जवानी' कई आयामों तक पहुंचने की कोशिश तो जरूर करती है, लेकिन पहुंचती कहीं नहीं है।साफ कहें तो कॉमेडी फिल्म के तौर पर बनाई गई इस मूवी से कॉमेडी का ही एलिमेंट एक तरह से गायब दिखता है।




देखे या नहीं


फिल्म समीक्षा ने फिल्म को 2 स्टार दिए हैं तो आप खुद ही समझ लीजिये.

 

और अंत में रेटिंग



फिल्म -इंदू की जवानी

मुख्य कलाकार - कियारा आडवाणी, आदित्य सील, इकबाल खान, राकेश बेदी

निर्देशक और लेखक - अबीर सेनगुप्ता

निर्माता- भूषण कुमार, निखिल आडवाणी

अवधि - 118 मिनट

रेटिंग -  2/5

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