Hangama 2 Film Review || हंगामा 2 फिल्म समीक्षा
करीब नौ साल बाद किसी हिंदी फिल्म के निर्देशन में वापस लौटे प्रियदर्शन की
नई फिल्म ‘हंगामा 2’ इन तीनों कसौटियों पर
शून्य है। प्रियदर्शन ने दक्षिण भारत में धूम मचाने के बाद हिंदी सिनेमा में भी
काफी लीक से हटकर फिल्में बनाई हैं और उनकी तमाम फिल्में सुपरहिट भी रही हैं, लेकिन हिंदी में हिट का उनका वनवास फिल्म ‘हंगामा 2’ में भी खत्म नहीं हो
पाया। उनकी हिंदी में आखिरी हिट फिल्म ‘भूल भुलैया’ 2007 में रिलीज हुई थी। प्रियदर्शन उसके बाद ‘मेरे बाप पहले आप’, ‘बिल्लू’, ‘दे दना दन’, ‘खट्टा मीठा’, ‘बम बम बोले’, ‘आक्रोश’ ‘तेज’ और ‘रंगरेज’ के रूप में आठ बैक टू
बैक फ्लॉप फिल्में बना चुके हैं। फिल्म ‘हंगामा 2’ उनकी नौवीं फ्लॉप फिल्म है।
निर्माता वाशू भगनानी के बेटे जैकी को हीरो बनाने की कोशिश भी प्रियदर्शन
अपनी पिछली हिंदी फिल्म ‘रंगरेज’ में कर चुके हैं। अब जावेद जाफरी के बेटे मीजान को
हीरो बनाने की कोशिश वह फिल्म ‘हंगामा 2’ में करते दिख रहे हैं लेकिन ये फिल्म देखने के बाद कहा
जा सकता है कि प्रियदर्शन को अब रिटायर हो जाना चाहिए। फिल्म ‘हंगामा 2’ देखने वाले आधे से
ज्यादा लोगों ने फिल्म उनके ही नाम से देखी लेकिन इसका हासिल सिवाय समय की बर्बादी
के कुछ नहीं है। किसी कॉमेडी फिल्म में संवादों का लेखन और उनकी अदायगी कितना
मायने रखती है, वह इस फिल्म को देखकर
समझ आता है। फिल्म में जॉनी लीवर या फिर बच्चों वाले सीन फिर भी थोड़ी बहुत राहत
दे पाते हैं, लेकिन फिल्म को कहानी के हिसाब से पूरा देखना बहुत बड़ा चैलेंज है।
कहानी
आकाश (मीज़ान जाफरी) अपने पिता कपूर (आशुतोष राणा) के दोस्त बजाज (मनोज जोशी) की बेटी से शादी करने के लिए पूरी तरह तैयार है। अपने दोनों बेटे और पोतों से परेशान कपूर साहब थोड़ा चैन की सांस लेते ही हैं, कि अचानक वाणी (प्रणिता सुभाष) नाम की एक लड़की गोद में एक बच्ची के साथ उनके दरवाजे पर आती है। वह दावा करती है कि उनका बेटा आकाश कपूर उसे प्रेग्नेंट कर छोड़ आया था और ये बच्ची उनके बेटे की है। आकाश इस बात सहमति जताता है कि वह वाणी को जानता है। दोनों साथ में कॉलेज में थे और फिर दोनों में प्यार हो जाता है। लेकिन वह बताता है वाणी एक दिन उसे अचानक छोड़कर भाग गई थी और कॉलेज के बाद उसने कभी उसे देखा भी नहीं है, और ये बच्ची उसकी नहीं है।
आकाश की
बजाज की बेटी के साथ शादी हो, इससे
पहले कपूर परिवार इस मामले की तह तक जाने का फैसला लेता है और इसमें उनका साथ देती
है अंजलि (शिल्पा शेट्टी)। अंजलि कपूर परिवार की करीबी है, जिसे कपूर साहब बेटी की तरह मानते हैं।
लेकिन अंजलि के शक्की पति राधे तिवारी (परेश रावल) को इस मामले की आधी अधूरी
जानकारी मिलती है और वह यह मानने लगता है कि अंजलि और आकाश का अफेयर चल रहा है।
यहां से कंफ्यूजन भरी कहानी की शुरुआत होती है।
स्टार की
परफॉरमेंस
हंगामा
2 में एक ओर जहां प्रियदर्शन फिल्मों के
पहचाने चेहरे जैसे परेश रावल, मनोज
जोशी, टीकू तलसानिया और राजपाल यादव दिखते
हैं। वहीं, मीजान जाफरी और प्रणिता जैसे नए कलाकार
भी शामिल हैं।
जॉनी लीवर और राजपाल यादव के हिस्से में जितना कुछ आया, दोनों ने अच्छे से निभा दिया। और हंसाने में सफल रहे हैं।
लेकिन, परेश रावल, शिल्पा शेट्टी और मीजान जाफरी तीनों मुख्य कलाकारों ने निराश किया। ये तीनों अब भी बीती सदी के सिनेमा में अटके कलाकारों से जैसे नजर आए। बहरहाल, इस फिल्म से शिल्पा शेट्टी अपने कमबैक को लेकर उत्साहित थीं। लेकिन फिल्म में उनका किरदार भी कोई प्रभाव नहीं छोड़ता है।
आशुतोष राणा फिर भी इन तीनों से बेहतर काम कर ले गए। फिल्म में प्रणिता
सुभाष भी हैं, ये याद रखना पडता है।आशुतोष राणा समेत इन सभी कलाकारों ने
अपने किरदार के साथ न्याय करने की कोशिश की है।
लेकिन
फिल्म की पटकथा इतनी कमजोर है कि किसी कलाकार के लिए कोई स्पेस नहीं छोड़ती है।
कुछ किरदार तो ऐसे लगते हैं कि उन्हें सिर्फ फ्रेम भरने के लिए रखा गया है। सभी
अपने पुराने देखे दिखाए हाव भाव के साथ दिखते हैं।
डायरेक्शन
प्रियदर्शन
की कॉमेडी फिल्मों का अपना एक अलग अंदाज होता है, एक फॉमूला होता है। भले ही वो उस फॉमूला का अपनी हर फिल्म में
इस्तेमाल क्यों ना कर लें,
कहानी में एक नयापन लगता है। लेकिन
हंगामा 2 यहीं फेल होती है। पूरी फिल्म में
गिनती के दृश्य होंगे तो आपके चेहरे पर मुस्कुराहट ला पाएंगे। पूरी फिल्म शुरु से
अंत तक सपाट चलती है। संवाद ऐसे कि आप सिर पकड़कर बैठ जाएं। यहां तक की वह अपने
पुराने चहेते स्टारकास्ट (परेश रावल, राजपाल
यादव, टिकू तलसानिया) का भी सही से उपयोग
करने में विफल रहे हैं। बता दें, हंगामा
2 प्रियदर्शन की ही मलयालम फिल्म
मीन्नारम का रीमेक है, जिसमें मुख्य किरदार मोहनलाल ने निभाया
था।
तकनीकी
पक्ष
अनुकल्प
गोस्वामी और मनीषा कोर्डे द्वारा लिखित संवाद बेहद निराशाजनक हैं। कॉमेडी फिल्म
में गालियों का इतना प्रयोग क्यों किया गया है, यह
समझ से परे है। जहां हाव भाव से काम चल सकता था, वहां भी संवाद घुसा दिये गए हैं, लिहाजा
फिल्म ढ़ाई घंटे से भी लंबी बन पड़ी है। कई दृश्यों में दोहराव है। फिल्म के एडिटर
एम एस अय्यपन नायर आराम से कैंची चलाकर फिल्म आधे घंटे तक छोटी कर सकते थे और कहानी
को थोड़ा बांधा जा सकता था। वहीं फिल्म का सबसे कमजोर पक्ष है पटकथा, जो कि यूनुस सजावल ने लिखा है।
संगीत
फिल्म
का म्यूजिक कंपोज किया है अनु मलिक ने और गीतकार है समीर। मीका सिंह की आवाज में
फिल्म का अंतिम गाना है हंगामा हो गया.. जिसे आप थोड़ा बहुत एन्जॉय कर सकते हैं।
चूंकि फिल्म ओटीटी पर रिलीज हुई है, काफी
उम्मीद है कि 'चुरा के दिल मेरा' रीमेक समेत फिल्म के बाकी सारे गाने आप
फॉरवर्ड कर देना चाहेंगे।
कहाँ रह
गयी
कमी
फिल्म पूरी तरह से समय की बर्बादी है। स्टार रेटिंग में जो एक प्वाइंट इसे मिलता है वह है इसकी सिनेमैटोग्राफी, कॉस्ट्यूम और बैकग्राउंड म्यूजिक के लिए। एन के एकाम्बरम ने कुदरती खूबसूरती को बहुत तरीके से कैमरे में कैद किया है। कोरोना संक्रमण काल में ये सिनेमैटोग्राफी देख तुरंत मनाली निकल जाने का मन भी करता है। रॉनी रफेल ने बैकग्राउंड म्यूजिक में अच्छा काम किया।
फिल्म के गाने समीर अनजान ने लिखे हैं और संगीत अनु
मलिक का है और दोनों कुछ ऐसा नया नहीं रच पाए जो आज के समय के हिसाब से हो। अनु
मलिक ने अपने ही गाने का जो रीमिक्स किया है,
वह और निराशाजनक है।
देखे या
नहीं
कुल
मिलाकर हंगामा 2 दिल तोड़ती है। अक्षय खन्ना, आफताब शिवदसानी और रिमी सेन अभिनीत साल
2003 में आई फिल्म 'हंगामा' एक मजेदार फिल्म थी और देखा जाए तो उसे फ्रैंचाइजी का रूप देना
अनावश्यक है। घिसी पिटी कहानी और किरदारों के साथ हंगामा 2 हंसाने में पूरी तरह से असफल रही है। फिल्म
समीक्षा की ओर से हंगामा 2 को 2 स्टार।
और अंत
में
रेटिंग
पटकथा: यूनुस सजावल।
संवाद: अनुकल्प गोस्वामी, मनीषा कोरडे
कलाकार: शिल्पा शेट्टी, प्रणिता सुभाष, परेश रावल, आशुतोष राणा, मीजान जाफरी, राजपाल यादव, टीकू तलसानिया, मनोज जोशी आदि।
लेखक,
निर्देशक: प्रियदर्शन
ओटीटी: डिज्नी प्लस हॉटस्टार











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