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AK vs AK Movie Review || एके वर्सेज एके फिल्म समीक्षा

 एके वर्सेज एके फिल्म समीक्षा || AK vs AK Movie Review



अनुराग कश्यप और अनिल कपूर की फिल्म AK Vs AK नेटफ्लिक्स पर रिलीज हो गई है। फिल्म का निर्देशन विक्रमादित्य मोटवानी ने किया है। फिल्म में अनिल और अनुराग ने अपना ही किरदार निभाया है।



कहानी


कहानी की शुरुआत में मीडिया इंटरैक्शन के दौरान अनुराग कश्यप और अनिल कपूर की लड़ाई हो जाती है। दोनों एक-दूसरे पर पर्सनल कमेंट्स करते हैं। यहां तक कि अनुराग सभी के सामने अनिल कपूर के चेहरे पर पानी फेंक देते हैं। 



इसके दोनों की यह लड़ाई सुर्खियों में आ जाती है। अब अनुराग कश्यप, अनिल कपूर को सबक सिखाना चाहते हैं तो वह सोनम कपूर को किडनैप कर लेते हैं और अनिल कपूर को टास्क देते हैं कि उन्हें सोनम को 10 घंटे के अंदर ढूंढना है। अब अनिल कपूर, सोनम को ढूंढ पाते हैं या नहीं इसके लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी।



स्टार की परफॉरमेंस


फिल्म में अनिल कपूर स्टार हैं और वो ये बात हर सीन के साथ साबित करते हैं। पहले सीन से लेकर आखिरी सीन तक अनिल कपूर इस फिल्म को अपने कंधों पर उठाने की कोशिश करते दिखते हैं। कहीं - कहीं वो सफल होते हैं तो कहीं बुरी तरह से विफल हो जाते हैं। लेकिन फिर भी किसी तरह वो खींचते हुए इस फिल्म को क्लाईमैक्स तक लेकर आ ही जाते हैं।



अनुराग कश्यप को दर्शकों ने इससे पहले भी फिल्मों में अभिनय करते देखा है लेकिन ये फिल्म उनका सबसे कमज़ोर काम है। अनुराग कश्यप इस फिल्म को अनिल कपूर के साथ मज़बूती से उठाने के प्रयास करने में इतनी ज़ोर से गिरते हैं कि दोबारा उठ ही नहीं पाते हैं। पूरी फिल्म में असली दिखने के चक्कर में अनुराग कश्यप इस फिल्म के सबसे नकली पात्र बनकर सामने आते हैं।



फिल्म में हर्षवर्धन कपूर के अलावा दो और सपोर्टिंग किरदार हैं। यूं कह लीजिए कि कैमियो। एक बोनी कपूर, दूसरा सोनम कपूर। हालांकि दोनों को ही स्क्रीन पर उनके ही किरदार में देखना थोड़ा दिलचस्प हो सकता था। लेकिन विक्रमादित्य मोटवाने ने इस फिल्म को बॉलीवुड के अंदर के गॉसिप से उठाकर सीधा एक थ्रिलर में बहुत ही होशियारी से फेंका है।



डायरेक्शन


डायरेक्टर विक्रमादित्य मोटवानी ने फिल्म का अच्छा निर्देशन किया है। इसकी स्क्रिप्ट भी कसी हुई है। फिल्म में हर चीजें असली लगती है क्योंकि इसे लिखा ही इस तरह गया है। फिल्म को जिस तरीके शूट किया गया वो वाकई काबिले तारीफ है। हिलता हुआ कैमरा और शूट के दौरान होने वाले शोर शराबे को एडिट नहीं किया गया है जो इस फिल्म को और रियल बनाता है।



कहा रह गयी कमी


फिल्म की सबसे बड़ी कमी है इसके वादे। ये फिल्म एक रियलिटी के करीब फिल्म होने का वादा करती है लेकिन उसे निभा नहीं पाती है। फिल्म में आंसू असली, खून असली, दिक्कत असली, सारे वादे वहीं ढेर हो जाते हैं जब आप अनिल कपूर और अनुराग कश्यप को अभिनेता के तौर पर देखते हैं। वहीं दूसरी तरफ, फिल्म की कहानी इतनी कमज़ोर है कि आप रियलिटी के ताने बाने में बुनी गई फिल्म को रफू करने की कोशिश भी नहीं कर सकते।

 


 

देखे या नहीं


कुल मिलाकर देखा जाए तो एके Vs एके एक अच्छा और नया एक्सपेरिमेंट जिसे 1.50 की फिल्म में बांधने की कोशिश की गई है। फिल्म के डायलॉग्स आपका ध्यान खींचते हैं। खासतौर से वो जहां अनुराग कश्यप और अनिल कपूर एक दूसरे की भर भर कर बेइज़्जती करते हैं। फिल्म क्लाईमैक्स पर आकर एक बार फिर बुझने से पहले ज़ोर से फड़फड़ाते दीए की लौ की तरह तेज़ चमकती भी है। 



ओवरऑल देखा जाए तो विक्रमादित्य मोटवानी, अनिल कपूर और अनुराग कश्यप ने मिलकर इस फिल्म के साथ एक अच्छा प्रयोग किया है जो काफी एंटरटेनिंग है। फिल्म में तीनों का बढ़िया काम नजर आता है।


और अंत में रेटिंग



ऐक्टर: अनिल कपूर, अनुराग कश्यप

निर्माता : दीपा मोटवाने

डायरेक्टर: विक्रमादित्य मोटवानी

अवधि: 1 घंटा 48 मिनट

रेटिंग: 3/5

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