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Mirzapur season-2 web series Review || मिर्जापुर सीजन- 2 (वेब सीरीज) समीक्षा

 

मिर्जापुर सीजन- 2 (वेब सीरीज समीक्षा) ||

 Mirzapur Season-2 Web Series Review  




इंडियन वेब सीरीज की सबसे पॉप्युलर सीरीज की गिनती की जाए तो उसमें 'मिर्जापुर' का नाम जरूर शामिल होगा। अपने पहले सीजन में ही यह सीरीज लोगों के बीच इतनी पॉप्युलर हो गई थी कि लोग इसके किरदारों को अभी तक नहीं भूले थे। अब पॉप्युलर सीरीज का दूसरा सीजन 'मिर्जापुर 2' रिलीज कर दिया गया है। फैन्स को सरप्राइज देते हुए मिर्जापुर के दूसरे सीजन को तय तारीख से एक दिन पहले ही रिलीज कर दिया गया है।





कहानी 


पिछले सीजन की कहानी जहां से खत्म हुई थी वहीं से दूसरे सीजन की कहानी शुरू होती है। अखंडानंद त्रिपाठी उर्फ कालीन भैया (पंकज त्रिपाठी) का बिगड़ैल लड़का मुन्ना (दिव्येंदु) गुड्डू पंडित (अली फजल) के भाई बबलू (विक्रांत मैसी) और गोलू गुप्ता (श्वेता त्रिपाठी) की बहन स्वीटी गुप्ता (श्रिया पिलगांवकर) को जान से मार देता है। अब गुड्डू पंडित और गोलू का एक ही लक्ष्य है और वह है मुन्ना त्रिपाठी और कालीन भैया से बदला लेना और पूरे मिर्जापुर पर राज करना। लेकिन कहानी में कुछ नए किरदारों की भी एंट्री होती जो अपने-अपने तरीके से मिर्जापुर पर राज करना चाहते हैं। जाहिर सी बात है कि इसमें भयंकर खून-खराबा और राजनीति होगी। बस यही है दूसरे सीजन की पूरी कहानी।




पहले सीजन की तरह ही इस सीजन में भी आपको भरपूर बंदूक, गुंडे और गालियां मिर्जापुर में शोर करते मिलेंगे। अब मिर्जापुर की लड़ाई और ज्यादा खूनी जंग में तब्दील हो गई है। पिछली बार की तरह ही कहानी का केंद्र मुन्ना और गुड्डू हैं और इस बार इतनी जानें जाएंगी कि आप भी सोचेंगे कि इनमें से कुछ जान नहीं भी जातीं तो कहानी आगे बढ़ सकती थी। अगर आपने 'मिर्जापुर' का पहला सीजन देखा है तो दूसरे सीजन से कनेक्ट हो जाएंगे लेकिन अगर आपने पहला सीजन नहीं भी देखा है तो दूसरे सीजन में पहले सीजन की पूरी कहानी शॉर्ट में दिखाई गई है और आप सीधे दूसरा सीजन भी देख सकते हैं।



पिछली बार की तरह ही इस बार भी डायलॉग्स इस वेब सीरीज की यूएसपी हैं। गाली-गलौज से भरे ये डायलॉग्स आपको आपत्तिजनक लग सकते हैं लेकिन इनके बिना रीऐलिटी दिखाना भी संभव नहीं है।





स्टार की परफॉरमेंस 





पिछले सीजन की तरह इस बार भी पहले ही एपिसोड से पंकज त्रिपाठी अपने कालीन भैया के किरदार में छा गए हैं। उनके एक लाइन के डायलॉग्स और एक्सप्रेशन जबरदस्त हैं। 





अली फजल पिछले सीजन जैसे ही दिख रहे हैं क्योंकि उनके पास कुछ ज्यादा करने के लिए इस बार था ही नहीं।





दिव्येंदु शर्मा पिछले सीजन की तरह ही खतरनाक और फनी लगे हैं।दिव्येंदु शर्मा के साथ चहेरे की मासूमियत की दिक्कत है।




श्वेता त्रिपाठी का रोल इस बार इंटेंस है और उन्होंने अपना किरदार भरपूर जिया है।



रसिका दुग्गल शुरुआती प्रभाव कहानी बढ़ने के साथ कम होता जाता है. यह जरूर है कि उनके किरदार के बदलते रंग के कारण उनमें दिलचस्पी बनी रहती है.




कहानी में थोड़ी देर को सही, कुलभूषण खरबंदा प्रभाव पैदा करते हैं.




इन सबके अलावा अंजुम शर्मा, राजेश तैलंग, दिब्येंदु भट्टाचार्य, अमित सियाल, शीबा चड्ढा, शाजी चौधरी, हर्षिता गौड़, लिलीपुट और मेघना मलिक जैसे कलाकार जो अपनी धाकड़ ऐक्टिंग के लिए जाने जाते हैं तो आप खुद ही अंदाजा लगा लें कि उनके किरदार उन्होंने कैसे निभाए होंगे।





डायरेक्शन 


निर्देशक जोड़ी गुरमीत सिंह और मिहिर देसाई ने जितनी कलात्मकता और नएपन से मिर्जापुर को पहले सीजन में रचा था, वह दूसरे सीजन में गायब हैं. यहां ज्यादातर यही महसूस होता है कि पहले सीजन की सफलता को भुनाने की कोशिश मात्र हैलेखक-निर्देशक ने इस बात का ध्यान कहानी में नहीं रखा क्योंकि इस बार किरदार डरते कम हैं, मरते ज्यादा हैं. उस पर गुड्डू-शबनम, रॉबिन-डिंपी की कमजोर प्रेम कहानियां कोई रोमांच पैदा नहीं करतीं.




कहाँ रह गयी कमी 


इस सीजन में दस एपिसोड हैं, जिनमें शुरुआती दो धीमी और उबाऊ गति से चलते हैं. तीसरे से कहानी थोड़ी जमती है और फिर यहां-वहां बिखरते हुए कुछ रफ्तार पकड़ती है मगर अंतिम दो एपिसोड में फिर ध्वस्त हो जाती है





देखे या नही 


अगर 'मिर्जापुर' का पहला सीजन देखा है तो इसे देखना बनता है क्योंकि आप इससे तुरंत कनेक्ट हो जाते हैं।



रेटिंग 




ऐक्टर:पंकज त्रिपाठी,अली फजल,दिव्येंदु शर्मा,श्वेता त्रिपाठी,कुलभूषण खरबंदा,रसिका दुग्गल,अंजुम शर्मा,राजेश तैलंग,दिब्येंदु भट्टाचार्य,अमित सियाल,शीबा चड्ढा,शाजी चौधरी,हर्षिता गौड़,लिलीपुट और मेघना मलिक

डायरेक्टर : करण अंशुमन,गुरमीत सिंह

श्रेणी:Hindi, Crime, Drama, Action

रेटिंग: 4/5

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