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Ginny Weds Sunny Film Review || 'गिन्नी वेड्स सनी' फिल्म समीक्षा

'गिन्नी वेड्स सनी' फिल्म समीक्षा || Ginny Weds Sunny Film Review




दिल्ली की पंजाबी लव स्टोरी के तौर पर पेश की गई है फिल्म 'गिनी वेड्स सनी' यह फिल्म साल 2007 में आई हॉलिवुड फिल्म 'Because I Said So' का देसी वर्जन है। पिछले काफी दिनों से दिल्ली और खासतौर पर पंजाबी शादियों पर बनी रोमांटिक कॉमिडी फिल्मों को बॉक्स ऑफिस पर अच्छे बिजनस की गारंटी माना जाता है।




प्यार में कन्फ्यूज़न के विषय पर हिंदी सिनेमा पर अनगिनत फ़िल्में बन चुकी हैं। कभी नायक को कन्फ्यूज़न होता है तो कभी नायिका को। जब किसी प्रचलित थीम पर फ़िल्म बनायी जाती है तो कहानी कहने का ढंग बेहद ज़रूरी हो जाता है। यही एक ऐसा तरीक़ा है, जो फ़िल्म को जीवंत बना सकता है और दर्शक के अंदर कुछ नया देखने का भाव जगाता है। अगर इसमें शिथिलता हुई तो फिर फ़िल्म के ढेर होने में वक़्त नहीं लगता। गिन्नी वेड्स सनी की कहानी, हिंदी सिनेमा के सदियों पुराने इसी फॉर्मूले को दोहराती है। मगर, फ़िल्म कुछ नया नहीं दे पाती। 


कहानी




फिल्म की कहानी दिल्ली की है जहां सनी सेठी (विक्रांत मैसी) जिसके दो ही सपने हैं पहला किसी अच्छी लड़की के साथ प्यार और शादी, दूसरा अपने पिता के हार्डवेअर स्टोर को तिलक नगर के तंदूरी नाइट्स में तब्दील करना। जब सनी की कहीं दाल नहीं गलती तो उसकी बचपन की क्रश गिन्नी जुनेजा (यामी गौतम) की मां (आयशा रजा) उसे अपनी बेटी का ऑफर देती हैं और हर वो तरकीब सिखाती हैं जिससे सनी किसी भी तरह गिन्नी को इंप्रेस कर ले लेकिन जब बात बनने ही वाली होती है तो गिन्नी का एक्स बॉयफ्रेंड निशांत (सुहेल नय्यर) की एंट्री होती है। अब सनी कैसे गिन्नी को पाता है इसके लिए आपको फिल्म देखनी होगी।




गिन्नी वेड्स सनी की कहानी बहुत ही सपाट और प्रेडिक्टेबल है, जिसकी वजह से फ़िल्म नीरस हो गयी है। हालांकि कुछ दृश्य गुदगुदाते हैं। सनी, जब गिन्नी की मां के निर्देशन में उसे इंप्रेस करने के लिए तरह-तरह के प्रपंच करता है, उन दृश्यों से थोड़ा सुकून मिलता है।




क्लाइमैक्स के दृश्यों में कुछ टेंशन पैदा करने की कोशिश की गयी है, मगर वो दृश्य इतने प्रेडिक्टेबल हैं कि सारा रोमांच ख़त्म हो जाता है। संवादों और उच्चारण के ज़रिए पंजाबी कल्चर और जज़्बे को उभारने की कोशिश की गयी है, मगर नवजोत गुलाटी और सुमित अरोड़ा के लेखन में कहीं-कहीं वो रवानगी मिसिंग लगती है और सब कुछ छोपा हुआ-सा लगने लगता है।


स्टार की परफोर्मेंस







 विक्रांत मैसी वेब सीरीज के सुपरस्टार हैं लेकिन फिल्मों में उन्हें कम ही मौका मिला है। इस बार विक्रांत को फिल्मों के हिसाब से कॉमिडी, इमोशन, डांस और धूम-धड़ाका करने का खूब मौका मिला है जिसका उन्होंने भरपूर फायदा भी उठाया है। विक्रांत मैसी की यह पहली कमर्शियल रोमांटिक-कॉमेडी फ़िल्म है, जिसमें उन्होंने लीड रोल निभाया है। विक्रांत की अभिनय क्षमता पर शक़ नहीं किया जा सकता। इस फ़िल्म में उन्होंने कुछ नया करने की कोशिश की है। गानों पर लिप सिंक किया है और डांस का हुनर दिखाया है। नेटफ्लिक्स की 'डॉली किट्टी और वो चमकते सितारे' और 'कार्गो' के बाद विक्रांत बिल्कुल अलग अंदाज़ में यहां दिखे हैं। हालांकि, उन्हें देखकर रोमांटिक हीरो वाला भाव नहीं आता।




यामी गौतम ने गिन्नी के किरदार की बेबाकी और बोल्डनेस को जीने की भरपूर कोशिश की है और काफ़ी हद तक इसमें कामयाब रही हैं। गिन्नी के तौर पर दिल्ली की पंजाबी कुड़ी के किरदार को यामी गौतम ने आराम से बेहतरीन तरीके से निभाया है। वह न केवल इस किरदार में नैचरल लगी हैं बल्कि बेहद खूबसूरत भी दिखती हैं।




फ़िल्म के सहयोगी किरदारों में शोभा जुनेजा का किरदार उभरकर आया है, जिसे आएशा रज़ा मिश्रा ने निभाया है। गिन्नी के मां के किरदार के लिए आयशा रजा परफेक्ट चॉइस हैं जिसमें वह अच्छी लगी हैं और वो पूरी फ़िल्म में छायी रही हैं।


फिल्म में दो पंजाबी गानों 'काला शा काला' और मीका सिंह का पहला सुपरहिट गाना 'सावन में लग गई आग' के नए वर्जन डाले गए हैं जो ठीक-ठाक हैं और लोगों को पसंद आ रहे हैं। फ़िल्म में मीका और बादशाह का गाना सावन में लग गयी आग ही याद रहता है। बाक़ी, खानापूर्ति के लिए हैं।


फिल्म की कहानी और डायलॉग्स नवजोत गुलाटी ने लिखे हैं जो फिल्म के मूड के हिसाब से कहीं-कहीं मिसफिट बैठते हैं। डायलॉग फिल्म के अजीब लग सकते हैं। फिल्म की कहानी अच्छी है लेकिन कई जगहों पर पटरी से उतरती दिखती है।


डायरेक्शन




निर्देशक पुनीत खन्ना ने एक हल्की-फुल्की रोमांटिक-कॉमेडी बनाने की कोशिश की, मगर बहुत सारे क्लीशे होने की वजह से दो घंटा पांच मिनट की इस रोमांटिक-कॉमेडी से प्यार होना मुश्किल है। फ़िल्म एक वक़्त के बाद खिंची हुई लगने लगती है। उन्होंने जैसे-तैसे गिन्नी और सनी की शादी तो बचा ली, मगर फ़िल्म नहीं बचा सके।


कहा रह गयी कमी




फ़िल्म के निर्माता विनोद बच्चन इससे पहले तनु वेड्स मनु जैसी फ़िल्म बना चुके हैं, जिसे आनंद एल राय ने निर्देशित किया था। शादी और प्यार में कन्फ्यूज़न पर बनी फ़िल्मों की फेहरिस्त में तनु वेड्स मनु का स्थान काफ़ी ऊपर है। इसी थीम को गिन्नी वेड्स सनी में भुनाने की कोशिश की गयी है, मगर इस बार मामला जमा नहीं। सबसे निराशाजनक बात यह है कि कहानी दिल्ली में सेट होने के बावजूद, 'दिल्ली' इस कहानी का हिस्सा नहीं बन पाती।


देखे या नही





हल्की-फुल्की कॉमिडी वाली दिल्ली की पंजाबी फिल्म देखनी हो तो वीकेंड

पर इसे देख सकते हैं।




कलाकार-       विक्रांत मैसी, यामी गौतम, राजेश गुप्ता, आएशा रज़ा मिश्रा, सुहैल नय्यर आदि।

निर्देशक-       पुनीत खन्ना

निर्माता-        विनोद बच्चन

श्रेणी-             हिंदी रोमांटिक कॉमेडी 

अवधि-          2 Hrs 5 Min

रेटिंग             2/5




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