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Beehad Ka Baghi (Web Series) Review || बीहड़ का बागी फिल्म समीक्षा

बीहड़ का बागी फिल्म समीक्षा || Beehad Ka Baghi (Web Series) Review 



चंबल के बीहड़ हमेशा से अपने डाकुओं के किस्सों के लिए मशहूर रहे हैं। चंबल के खूंखार डाकुओं की चर्चा विदेशों तक रही है। अब इस मुद्दे पर फ्री ओटीटी प्लैटफॉर्म MX Player अपनी ऑरिजनल वेब सीरीज 'बीहड़ का बागी' लेकर आया है। केवल 5 एपिसोड वाली इस सीरीज में बताया गया है कि कैसे एक सामान्य आदमी डकैत बनकर गरीबों का मसीहा बनता है और बाद में विलन का रूप ले लेता है।




कहानी


कहानी साल 1998 से शुरू होती है जबकि बुंदेलखंड के चित्रकूट के रहने वाले सीधे-साधे आदमी शिव कुमार के पिता और बहन को गांव के दबंग लोग दिनदहाड़े काटकर मार देते हैं। शिव कुमार तुरंत ही अपनों की मौत का बदला लेने निकल जाता है और वह लगातार गांव के दबंगों के पूरे परिवार को खत्म कर देता है। इसके बाद शिव कुमार डाकुओं के गैंग में शामिल हो जाता है। हालांकि शिव कुमार अन्य डाकुओं जैसा नहीं है।



उसके सिद्धांत और गरीबों की मदद करने जैसी बातें उसे गैंग का लीडर और गरीबों का मसीहा बना देती हैं। इसी बीच राजनीतिक दल शिव कुमार की लोकप्रियता का फायदा उठाना चाहते हैं जिससे शिव कुमार के अंदर घमंड आ जाता है और कहानी एकदम से पूरी तरह तब बदल जाती है जबकि शिव कुमार हीरो से विलन बन जाता है।




स्टार की परफॉरमेंस


सीरीज का पूरा बोझ इस बार शिव कुमार के रूप में दिलीप आर्य पर रहा है जिन्होंने अपना काम बखूबी निभाया है। भ्रष्ट नेता जगत प्रभु के किरदार में रवि खानविलकर, एसपी अजय सिन्हा के किरदार में इंद्रनील भट्टाचार्य और डाकू के किरदार में जीतू शास्त्री ने बढ़िया ऐक्टिंग की है।

इस सीरीज में लॉरा मिश्रा और पारुल बंसल एकदम डी-ग्लैम अवतार में जमीं हैं और इनके किरदार को थोड़ा और लंबा किया जा सकता था। विनोद नाहरडीह और शशिभूषण चतुर्वेदी के किरदार भी काफी सोच-समझकर लिखे गए हैं।




डायरेक्शन


डायरेक्टर के तौर पर रीतम श्रीवास्तव की तारीफ करनी होगी कि उन्होंने बिल्कुल बुंदेलखंड के माहौल को फील करते हुए इस सीरीज का डायरेक्शन किया है।




कहाँ रह गयी कमी


देखिए आप अगर एक बार भी चित्रकूट, बाँदा इत्यादि गए है और आपका वास्ता किसी भी ऐसे व्यक्ति से हुआ है जो यहाँ का रहने वाला है तो आपको उनके बात करने के लहजे और फ़िल्म की बोली में साफ-साफ अन्तर नजर आ जायेगा, वेब सीरीज पक्के तौर पर यहीं मार खा जाती है। क्लाईमेक्स ऐसा लगता है मानो खुद डायरेक्टर के सर पर बंदूक की नली रखकर जल्द खत्म कराया गया हो, पूरीवेब सीरीज देखने के बाद भी आप निर्णय नही कर पाते कि आखिर फ़िल्म में हीरो कौन है और कौन विलेन।




देखे या नहीं


बुंदेलखंड के डाकुओं की कहानियों में इंट्रेस्ट हो और कम समय में अच्छी सीरीज देखना चाहते हों तो इसे देख सकते हैं।


और अंत में रेटिंग




ऐक्टर: दिलीप आर्य,रवि खानविलकर,इंद्रनील भट्टाचार्य,लॉरा मिश्रा,पारुल बंसल,विनोद नाहरडीह

डायरेक्टर: रीतम श्रीवास्तव

श्रेणी: Hindi, Action, Drama

रेटिंग: 3/5

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