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'High' Web Series Review || 'हाई' वेब सीरीज समीक्षा

'हाई' वेब सीरीज समीक्षा || 'High' Web Series Review 




ड्रग्स के मुद्दे पर बेहतरीन वेब सीरीज MXPlayer ने अपने फ्री प्लैटफॉर्म   पर लॉन्च की है जो काफी हद तक ड्रग्स के धंधे और उसके पीछे की एक  कहानी को बताती है।




एमएक्स की यह वेब सीरीज दिखाती है कि कैसे नशे के कारोबार से उसे  यूज करने वाले ही नहीं बल्कि क्रिमिनलसिस्टमकॉर्पोरेट और बाकी के लोग जुड़े हुए हैं. सीरीज में मीडिया का एक ऐसा काला चेहरा दिखाया गया है जिसे शायद आज लोग देखना चाहते हैं।

 




 कहानी

एमएक्स की इस धमाकेदार वेब सीरीज की कहानी 70 के दशक में एक जंगल से शुरू होती है जहां कुछ लोग एक ऐसी जड़ी-बूटी की तलाश में हैं जिसे जादुई बोला जाता है और वो कई मानसिक रोगों जैसे अल्जाइमर, के इलाज में रामबाण साबित हो सकती है। इस सीरीज की कहानी यही जड़ी-बूटी बनती है, जिसका सही नहीं बल्कि गलत इस्तेमाल किया जाता है। इस जड़ी-बूटी की खोज में आगे बहुत लोगों के लालच जुड़ जाते हैं जिसके कारण कई लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है। सीरीज में ड्रग्स का एक ऐसा जाल दिखाया गया है जिसे देखकर किसी के भी होश उड़ जाएं।




स्टार कास्ट की परफॉरमेंस 

सीरीज में वीरेंद्र सक्सेना का छोटा सा रोल छाप छोड़ता है जो एक बुजुर्ग साइंटिस्ट हैं लेकिन मीडिया उन्हें एक नक्सलवादी के तौर पर दिखाता है क्योंकि वह हाशिये पर रह रहे लोगों के लिए काम करते हैं।




इस सीरीज में अक्षय ओबेरॉय, रणवीर शौरी और मृणमयी गोडबोले छा गए हैं। इन लोगों ने अपने रोल में इतनी जान डाली है कि आप इनके सीन का इंतजार करेंगे। सीरीज का पहला एपिसोड आपको बांधने में कामयाब होगा क्योंकि एक ड्रग अडिक्ट के तौर पर अक्षय ओबेरॉय की परफॉर्मेंस इतनी जानदार है कि आप उनके कैरेक्टर का इतिहास जानने के लिए पूरी वेब सीरीज देख डालेंगे।




डॉक्टर के रोल में प्रकाश बेलावडी और उनके असिस्टेंट के किरदार में श्वेता बसु प्रसाद और नकुल भल्ला जबरदस्त हैं। इससे ज्यादा बताना ठीक नहीं होगा वरना आपको मजा नहीं आएगा।

 


डायरेक्शन 


निर्देशक के रूप में निखिल राव प्रभावित करते हैं। रोमांच को बनाए रखते हुए उन्हें कई बातों को समेटना था और उन्होंने यह काम अच्छे से किया है।




कहाँ रह गयी कमी 


नौ एपिसोड में फैली इस सीरिज में सस्पेंस को कायम रखने की कोशिश की गई है, लेकिन यह कई बार दर्शकों को थका भी देती है। दोहराव भी देखने को मिलते हैं। सीरिज को लंबी रखने की जिद जाने क्यों की जाती है। चार-पांच एपिसोड में भी बात को खत्म किया जा सकता है। साथ ही कुछ जगह यह बहुत फिल्मी भी हो गई है। खासतौर पर विलेन के किरदार सत्तर के दशक के खलनायकों की याद दिलाते हैं। वे बेवजह गालियां बकते रहते हैं। कुछ किरदार विश्वसनीय नहीं है और कुछ जगह लेखकों से भी चूक हुई है।

 




देखे या नही 

जब ड्रग्स के ऊपर इतनी ही चर्चा चल रही है तो ऐसी थ्रिलर वेब सीरीज को देखना बनता है। हाई में क्राइम, ड्रामा और थ्रिल है और इसे देखा जा सकता है।

 

और अंत में रेटिंग 



ऐक्टर: अक्षय ओबेरॉय, रणवीर शौरी, मृणमयी गोडबोले, श्वेता बसु प्रसाद, प्रकाश बेलावडी, नकुल भल्ला, करुण नायक

डायरेक्टर : निखिल राव

श्रेणी: Crime, Drama, Action, Thriller

रेटिंग: 4/5


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